आज की चौपाई

श्री धनीजी के लागूँ पाए,मेरे पिउजी फेरा सुफल हो जाए।
ज्यों पिउ ओलखाए मेरे पिउजी ,सुनियो हो प्यारे मेरी विनती।।

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श्री किताब सागर मूलमिलावे के लिखे हैं ऐस...

Shri Nijanand Samparday
Question: श्री किताब सागर मूलमिलावे के लिखे हैं ऐसा श्री मुखवाणी में वर्णन आता है तो वोह कौन से सागर हैं उनके नाम बताईए सुन्दरसाथ जी

Answer: नूर,नीर, खीर, दघि, घृत, मधु, रस और सर्वरस ये आढ सागर ही मूलमिलावे के लिखे हैं जिनकी श्री राजी महाराज के आठ अंग करके भी कहा है