श्री धनीजी के लागूँ पाए,मेरे पिउजी फेरा सुफल हो जाए।
ज्यों पिउ ओलखाए मेरे पिउजी ,सुनियो हो प्यारे मेरी विनती।।
सुक सनकादिक ने नव टली,लखमी नारायण ने फरी...

Question: सुक सनकादिक ने नव टली,लखमी नारायण ने फरीवली। विष्णु वैकुंठ लीधां माहें,सागर सिखर न मूक्या क्यांहें।। वाणी की इस चौपाई में किसकी बात हो रही है जिसमें सब शामिल हैं बताईए सुन्दरसाथ जी
Answer: इसमें माया के बारे में बात हो रही है कि इसने शुकदेव मुनि तथा सनकादिक ऋषियों (सनक, सनन्दन, सनातन, सनत कुमार) को भी इसने नहीं छोड़ा। लक्ष्मी और नारायण जो जगत के परमात्मा हैं, को भी इस माया ने अपने फन्दे में फंसा रखा है। बैकुण्ठ में बैठे विष्णु भगवान को भी अपने अन्दर ले लिया है, अर्थात् समुद्र से पहाड़ की चोटी तक (पाताल से बैकुण्ठ व नारायण भगवान सन्पूर्ण क्षर पुरुष) किसी को माया ने नहीं छोड़ा।