श्री धनीजी के लागूँ पाए,मेरे पिउजी फेरा सुफल हो जाए।
ज्यों पिउ ओलखाए मेरे पिउजी ,सुनियो हो प्यारे मेरी विनती।।
साथ हतो जे इंद्रावती पासे, वाले पूरी तेन...

Question: साथ हतो जे इंद्रावती पासे, वाले पूरी तेनी आस रे। सकल मनोरथ पूरण थया रे, फलिया ते रास प्रकास रे।। ये कहाँ का प्रसंग है और कौन श्री इंद्रावती जी के साथ कहाँ था जिन की आस भी उन्होंने पूरी की थी बताई सुन्दरसाथ जी
Answer: हवसा में श्री इन्द्रावतीजी के साथ जो दो और साथी थे, (सांवलिया ठाकुर और ऊधो ठाकुर) को भी दर्शन देकर उनकी भी चाहना राजजी ने पूर्ण की। इस प्रकार हमारी सब चाहना पूर्ण हो गई। रास और प्रकाश का फल मिल गया अर्थात् धनी मिल गए।