रूहअल्ला एता कहियो, तुम मांग्या सो फरामोस ।
जब इस्क ज्यादा आवसी, तब आवसी माहें होस ।।
महामत कहें सावचेत होड्यो, मिल्या है अंकू...

Question: महामत कहें सावचेत होड्यो, मिल्या है अंकूरों आई। झूठी छूटे सांची पाइए, सतगुर लीजे रिझाई।। हम सतगुरु को इस खेल में कैसे रिझा सकते हैं बताईए सुन्दराथ जी
Answer: श्री महामतिजी कहते हैं कि हे साथजी! तुम माया में सावधान हो जाओ। तुम्हारी निसबत होने के कारण ही धनी माया में आकर मिले हैं, अतः यदि इस झूठी दुनियां को छोड़कर रूह दुनी को पीठ देकर अखण्ड परमधाम के अखंड सुख याद करके अपने पिया को याद करती है तो वोह ऐसे सतगुरु को इस खेल में रिझा लेगी।