आज की चौपाई

श्री धनीजी के लागूँ पाए,मेरे पिउजी फेरा सुफल हो जाए।
ज्यों पिउ ओलखाए मेरे पिउजी ,सुनियो हो प्यारे मेरी विनती।।

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महामत कहें सावचेत होड्यो, मिल्या है अंकू...

Shri Nijanand Samparday
Question: महामत कहें सावचेत होड्यो, मिल्या है अंकूरों आई। झूठी छूटे सांची पाइए, सतगुर लीजे रिझाई।। हम सतगुरु को इस खेल में कैसे रिझा सकते हैं बताईए सुन्दराथ जी

Answer: श्री महामतिजी कहते हैं कि हे साथजी! तुम माया में सावधान हो जाओ। तुम्हारी निसबत होने के कारण ही धनी माया में आकर मिले हैं, अतः यदि इस झूठी दुनियां को छोड़कर रूह दुनी को पीठ देकर अखण्ड परमधाम के अखंड सुख याद करके अपने पिया को याद करती है तो वोह ऐसे सतगुरु को इस खेल में रिझा लेगी।