रूहअल्ला एता कहियो, तुम मांग्या सो फरामोस ।
जब इस्क ज्यादा आवसी, तब आवसी माहें होस ।।
परमधाम में हरेक की खुराक इश्क है तो परमध...

Question: परमधाम में हरेक की खुराक इश्क है तो परमधाम में ही रहने वाली श्री अक्षरब्रह्म जी की आनंद अंग श्री लक्ष्मी जी अपनी खुराक कैसे लेती हैं क्योंकि अक्षरब्रह्म तो सत्ता के सरूप हैं इश्क के नहीं। बताईए सुन्दरसाथ जी
Answer: रूहों की जैसी साहेबी परमधाम में है, लक्ष्मीजी को भी इसी तरह समझें। इनकी एकदिली में फर्क नहीं है, इसकी जानकारी रूहों को ही है जिनका तन परमधाम में है