मैं फुरमान भेज्या है अव्वल, हाथ अमीन रसूल ।
इमाम भेज्या रूहों वास्ते, जिन जावें ए भूल ।।
विजिया अभिनंद बुधजी, और नेहेकलंक इत आए।...

Question: विजिया अभिनंद बुधजी, और नेहेकलंक इत आए। मुक्त देसी सबन को, मेट सबे असुराए ।। इस चौपाई में किन दो सरूपों की बात कही गई है बताईए सुन्दरसाथ जी
Answer: विजया अभिनंद बुद्ध जी मलकी सरूप धनी श्री देवचन्द्र जी को कहा है और नेहेकलंक श्री जी साहिब हकी सरूप को कहा है