जिन केहेनी किल्लीय से, खुल्या भिस्त का द्वार।
सो केहेनी छुड़ाई हुकमें, दे फैल रेहेनी सार ।। खि. 5/14
सुक सनकादिक ने नव टली,लखमी नारायण ने फरी...

Question: सुक सनकादिक ने नव टली,लखमी नारायण ने फरीवली। विष्णु वैकुंठ लीधां माहें,सागर सिखर न मूक्या क्यांहें।। वाणी की इस चौपाई में किसकी बात हो रही है जिसमें सब शामिल हैं बताईए सुन्दरसाथ जी
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