आज की चौपाई

कुलजम सरूप ग्रन्थ को, सेवे आठों जाम। उन सब सुन्दरसाथ को, करूं दण्डवत प्रणाम।।

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ईमान इश्क आत्म के दो पर हैं वोह उसे वाणी...

Shri Nijanand Samparday
Question: ईमान इश्क आत्म के दो पर हैं वोह उसे वाणी की कौन सी न्यामत मिलने पर मिलते हैं बताईए सुन्दरसाथ जी

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