विजिया अभिनंद बुधजी, और नेहेकलंक इत आए।
मुक्त देसी सबन को, मेट सबे असुराए ।।
विजिया अभिनंद बुधजी, और नेहेकलंक इत आए।...

Question: विजिया अभिनंद बुधजी, और नेहेकलंक इत आए। मुक्त देसी सबन को, मेट सबे असुराए ।। इस चौपाई में किन दो सरूपों की बात कही गई है बताईए सुन्दरसाथ जी
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