श्री धनीजी के लागूँ पाए,मेरे पिउजी फेरा सुफल हो जाए।
ज्यों पिउ ओलखाए मेरे पिउजी ,सुनियो हो प्यारे मेरी विनती।।
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दसवी सदी में रूहअल्लाह श्री श्यामा जी महारानी श्री देवचंद जी के तन मे प्रकट हुए, ओर ग्यारवीं सदी में श्री प्राण नाथ जी आए इन दोनो स्वरूपो ने मोमिनो की जमात को इक्ट्ठा किया l कुरान में जो दस ओर दो बुर्ज कहे है वह बाहरवीं शताब्दी का वर्णन है दसवी सदी के ऊपर दो बुर्ज ही दो स्वरूप है इन दो स्वरूपो की मोमिनो को पहचान करनी है l प्रणाम जी
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कृपा राम
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ते माटे तमें सुणजो साथ, एक कहूं अनुपम वात। चरचा सुणजो दिन ने रात, आपण ने त्रूठा प्राणनाथ।। रास प्रकरण दो
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कुरान के एक किस्से में मलकी महंमद श्री श्यामा जी को आसमानी मुर्ग करके कहा है जिसने ईलम के सागर में नहाकर अपने पंख फड़फड़ाये जिससे बूंदे गिरीं और उन बूंदों से भाव उन मोमिनों से है जिन्होंने हकी मुहम्मद श्री प्राणनाथ जी की पहचान उन्हीं के ज्ञान द्वारा समस्त जगत में पैगाम पहुँचा उनको जाहिर किया
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रंगमहल की दक्षिण दिशा में बटपीपल की चौकी फिर हौजकौसर ताल को घेरकर कुंज निकुज की शोभा आगे चौबीस हांस का महल फिर जेवरों की नहरें आगे माणिक पहाड़ और उसकी हद में ही बड़ो बन मधु बन महावन फिर वन की नहरें और उसके आगे छोटी रांग बड़ी रांग की हवेलियों की शोभा के साथ जिमीं और सागरों की शोभा भी आई है और दक्षिण दिशा में नीर सागर की शोभा भी आई है
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