आज की चौपाई

रूहअल्ला एता कहियो, तुम मांग्या सो फरामोस ।
जब इस्क ज्यादा आवसी, तब आवसी माहें होस ।।

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Shri Nijanand Samparday

"दुख रे प्यारो मेरे प्राण को" किरंतन के इस प्रकरण में "महामत खेलें अपने लाल सों " में किस लाल से तात्पर्य है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

अपने पिया संग खेलती है जो सारे ब्रहमांड के अक्षरातीत हैं

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Shri Nijanand Samparday

हौज कौसर की पाल के नीचे कितने मन्दिरों की हार और कितने थंभों की हार के साथ कितनी गलियां आईं है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

दो मंदिरों की हार के बीच में दो थंभों की हार में तीन गलियां सुशोभित हैं

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Shri Nijanand Samparday

चेतो सबे सत वादियो, सुनियो सो सतगुर मुख बान। धनी मेरा प्रभु विश्व का, प्रगटिया परवान।। यह चौ. कहाँ उतरी थी और इसमें क्या जाहिर किया है बताईए साथ जी

by Shri Nijanand Samparday

यह चौ. हरिद्वार में उतरी थी और इसमें बताया है कि हे सब धर्मों के ज्ञानियो! सत (पारब्रह्म) का ज्ञान देने वाले सतगुरु आ गए हैं। उनकी वाणी को सुनो। पारब्रह्म मेरे तो धनी हैं। संसार के प्रभु हैं। वह प्रगट हो गए हैं। आत्म कभी भी उनको प्रभु करके सम्बोधन नहीं करेगी

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Shri Nijanand Samparday

श्री महामति जी ने हम सुन्दरसाथ को अर्श की वाणी कौन से ग्रन्थों के रूप में बकशीश करी है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

श्री कुलजम सरूप साहिब, श्री बीतक साहिब और बडी वृत

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Shri Nijanand Samparday

वैष्णव किसको कहते हैं बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

वैष्णव कहिर वाको . निर्मल जाकी आत्म । नीच कर्म के निकट न जाए , जाए पहचान करी पारब्रहम॥

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