श्री धनीजी के लागूँ पाए,मेरे पिउजी फेरा सुफल हो जाए।
ज्यों पिउ ओलखाए मेरे पिउजी ,सुनियो हो प्यारे मेरी विनती।।
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श्री श्यामा महारानी के चरणों के चारों आभूषण झांझरी, घूंघरी, कांबी और कड़ला तथा चरणों के पंजे में अनवट और बिछुआ का तेज और सुन्दर सुरीली आवाज यह ही मेरे जीव के जीवन हैं।
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धनी के प्रेम का रास्ता बड़ा कठिन है। इसमें कई कर्मकाण्ड (शरीयत) उपासनाकाण्ड (तरीकत) और ज्ञानकाण्ड (हकीकत) के तीन टेढ़े रास्ते यानि की तीन बंकर हैं, जिन पर चलने वाले बड़े-बड़े शूरवीर भी इस प्रेम-मार्ग पर नहीं चल पाते। यह रास्ता तलवार की धार पर चलने के समान है। इस रास्ते में सामने से गुण, अंग, इन्द्रियों के भाले छेद रहे हैं, इसलिए हे मेरी आत्मा! तुम धैर्य और साहस का श्रृंगार करके चलो।
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हवसा में श्री इन्द्रावतीजी के साथ जो दो और साथी थे, (सांवलिया ठाकुर और ऊधो ठाकुर) को भी दर्शन देकर उनकी भी चाहना राजजी ने पूर्ण की। इस प्रकार हमारी सब चाहना पूर्ण हो गई। रास और प्रकाश का फल मिल गया अर्थात् धनी मिल गए।
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कुरान में यह भी लिखा है कि आखिरत को हिन्दुओं के बीच सब नबी आएंगे। सारे भारतवर्ष में ही ब्रह्मसृष्टियां उतरेंगी। धनी ने ब्रह्मसृष्टियों को बड़ाई दी है।
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हवसा में श्री इन्द्रावतीजी के साथ जो दो और साथी थे, (सांवलिया ठाकुर और ऊधो ठाकुर) उनकी भी चाहना राजजी ने पूर्ण की। इस प्रकार हमारी सब चाहना पूर्ण हो गई। रास और प्रकाश का फल मिल गया अर्थात् धनी मिल गए।
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