जब याद तुमें मैं आंऊगा, तबहीं बैठोगे जाग ।
गए आए कहूं नहीं, सब रूहें बैठीं अंग लाग ।।
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चौदह मंडलियां
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तारतम वाणी से विचार करके देखो। पहला फेरा (ब्रज, रास) किस तरह से हुआ। किस तरह आपने हमारी चाहना पूर्ण की। उसके बाद कैसे अपने घर (परमधाम) में जागे। इस फेरे (तीसरा ब्रह्माण्ड) में हम किस तरह से आए और आप किस तरह से आए। आप कौन तथा आपके अन्दर कौन है, मुझे फिर से अच्छी तरह कहकर समझाइए। आप स्वयं धाम-धनी पधारे हैं। तो फिर हमें ब्रज रास की आड़ क्यूं देते हो। इन्द्रावती से आपने यह भेद क्यों छिपाया है, इसका...
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जैसे ही नंद बाबा के घर वसुदेव जी प्रवेश करते हैं तभी श्री राज का प्रगटन होता है "मूल सूरत अक्षर की जेह,जिन चाह्या देखू प्रेम सनेह, सो सूरत ले धनी को आवेश नंद घर कियो प्रवेश ।"
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सुबह पौने छः बजे से दोपहर तीन बजे तक
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स्वपन की व्यास जी की भागवत में थोड़ा सा रास का वर्णन आता है वोह भी जो इस कालमाया के ब्रह्मांड मे खेली गई थी योगमाया की रास बिना जाग्रत बुद्ध के किसी को पता नही चल सकती , इसलिए हमारी जो भागवत है वोह श्री रास ग्रन्थ है जिसमें सम्पूर्ण लीला का वर्णन आता है । श्याम जी के मन्दिर में राजी जाग्रत बुद्ध को साथ लेकर आए थे तभी देवचन्द्र जी द्वारा गांग जी भाई को जाग्रत बुद्ध की पहचान देने के बाद ब्रज रास...
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