रूहअल्ला एता कहियो, तुम मांग्या सो फरामोस ।
जब इस्क ज्यादा आवसी, तब आवसी माहें होस ।।
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अब दूसरी बार हुकम के स्वरूप श्री मुहम्मद साहब जिनमें आत्म अक्षर और जोश धनी धाम दो शक्तियां थी जो ब्रज रास खेल कर अरब में श्री महमंद साहब के अंदर आ गई थी वोह और श्री श्यामाजी दोनों मिलकर श्री प्राणनाथजी हकी सरूप के अन्दर हैं और वही सखियां भी फिर सुन्दरसाथ के रूप में आई हैं। यह श्री प्राणनाथजी के अन्दर पांचों शक्तियों (धनीजी का जोश, श्यामाजी, आत्म-अक्षर, जागृत बुद्धि और हुकम) के दर्शन करती हैं। यह स...
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सुन्दर साथ जी श्री परमधाम में श्री नूर बाग की चांदनी पर फूलबाग की शोभा आई है जिसमें नहरें चेहेबच्चे,और बगीचों में असंख्य फूलों की अपरम्पार शोभा आई है
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श्री कुलज़म सरूप साहिब की 18758 चौपाईयां ही आखिरत के वचन हैं जो हम सुन्दरसाथ के लिए श्री जी साहिब जी ने कहे हैं वाणी में भी आता है पिछले कारण वाणी कही प्रणाम जी
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पन्ना जी में जब श्री जी भ्रमण करते हुए खिजड़ा पेड़ के नीचे बैठे हुए थे तब श्री छत्रसाल जी ने आकर उनको प्रणाम करके कहा कि श्री जी आपकी मेहर से अफगन खां से युद्ध में विजय प्राप्त कर ली है बिना आपकी मेहर से यह संभव नही था तो फिर यहीं खिजड़ा से श्री जी साहिब जी को सवारी में बिठा कर श्री छत्रसाल जी महाराज गाजे बाजे के साथ जयकारे लगाते हुए श्री बंगला जी में लेकर आए थे । तब से ही यह उसी प्रकार प्रसंग मन...
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सुन्दर साथ जी श्री कुलजम सरूप साहिब के चौदह अंग है 1- रास - श्री राजी महाराज के चरण 2- प्रकाश - पिंडुरियां 3- खटरूती - घुटन 4- कलश - जंघा 5- संनध- कमर 6- किरंतन -कर हस्तकमल 7- खुलासा - नाभि 8- खिलवत- उदर पेट 9- परिक्रमा - हृदय 10- सागर- कंठ 11- सिंगार - मुखारविंद 12- सिंधी- नासिका 13- मार्फत सागर- श्रवण 14 - कयामत नामा - नयन इस प्रकार ये श्री राजी महाराज के 14 अंग हैं
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