आज की चौपाई

श्री धनीजी के लागूँ पाए,मेरे पिउजी फेरा सुफल हो जाए।
ज्यों पिउ ओलखाए मेरे पिउजी ,सुनियो हो प्यारे मेरी विनती।।

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Shri Nijanand Samparday

देख्या ब्रजरास को, तीसरे जो हिसाब । आए मेरे आगे बातें करे, लेकर बड़ा सवाब ॥ मंगलाचरण की इस चौ. में किन बातों का जिक्र किया गया है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

ब्रज में ११ साल ५२ दिन की लीला और रास में एक अखण्ड रात्रि की लीला देखने के बाद जब परमधाम वापिस गए तो उल्टा श्री राज जी महाराज कहते हैं कि मुझे ही रूहें सिखापन देने लगी कि आपकी माया ने ब्रज, रास में हमारा क्या बिगाड़ा। ये माया एक पल भी आपके चरणों से जुदा नहीं कर सकी। इसलिए आपने जो-जो खेल में दिखाने को कहा था और ब्रज रास में नहीं देखा, वह हमने अब अवश्य ही देखना है।

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यह दृश्य कहाँ का है बताईए सुन्दरसाथ जी

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श्री पुखराज जी का

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हो वतनी बांधो कमर तुम बांधो, सुरत पिआसों साधो । तीनों कांडों बड़ा सुकदेव,ताकी बानी को कहूं भेव ।। इस चौपाई में तीनों कांडों से क्या अभिप्राय है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

हे परमधाम के प्यारे सुन्दरसाथ ! तुम कमर बांधकर खड़े हो जाओ और अपनी सुरता (ध्यान) को धनी के चरणों में लगा दो। कर्म, उपासना और ज्ञान तीनों काण्डों में शुकदेवजी का ज्ञान बड़ा है। उनकी वाणी की हकीकत मैं बताती हूं।

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नहीं कोई सुख इन समान , अंगना तो कोटि बेर कुरबान। यह चरण हम रोज बोलते हैं इसमें ऐसा कौन सा सुख है जो किसी सुख के समान नहीं है बताईए सुन्दरसाथ जी

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श्री राज जी के मुखारबिंद की शोभा को देखने के सुख से बड़ा कोई सुख नहीं है सुन्दरसाथ जी

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उदयपुर से जो श्री जी ने फकीरी भेष धारण किया था वोह उन्होंने कहाँ तक पहना था बताईए सुन्दरसाथ जी

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पन्ना जी तक

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