आज की चौपाई

रूहअल्ला एता कहियो, तुम मांग्या सो फरामोस ।
जब इस्क ज्यादा आवसी, तब आवसी माहें होस ।।

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Shri Nijanand Samparday

श्री बीतक साहिब में शाहजहाँ पुर में दज्जाल ने ऐसा क्या किया जिससे श्री जी और मोमिनों को बहुत दुखों का सामना करना पड़ा । बताईए सुन्दरसाथ जी

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मिरगी की बीमारी फैल गई थी

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कुंजी ल्याए रूहअल्ला, जासों पावें सब फल। ज्यों कर ताला खोलिए, सो जाने न कोई कल ।। सो कुंजी साहेब ने, मेरे हाथ दई। जिन बिध ताला खोलिए, सो सब हकीकत कही।। कुंजी कौन लाया और किसको कुंजी सौंपी ये सारे भेद खोलें सुन्दरसाथ जी

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कुंजी श्री श्यामा जी लाई पर उन्होंने उस कुंजी से कुछ नहीं खोला क्योंकि उनके पास ताला खोलने की कला नहीं थी ( यानि हुकम नहीं था ) कुंजी उन्होंने श्री इन्द्रावती जी को सौंपी जिससे श्री इन्द्रावती जी ने सारे संसार के ग्रन्थों के, धर्मों के ताले खोल कर श्री प्राणनाथ जी एक पूर्णब्रहम की पहचान पसराई

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सरूप रूहों के मन के, जो कछुए मन चाहे । ऊपर तले माहे बाहेर, एक पल में काम कर आएं ॥ रूहो के मन का सरूप कौन है बताईए सुन्दरसाथ जी

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खूब खुसालियां रूहों के मन का सरूप हैं

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हुकमें देखाया हुकम को, तिन हुकमें देख्या हुकम । भिस्त दोजख उन हुकमें, आखिर सुख सब दम ।। सिंधी 16/10 इस चौपाई का मतलब बताईए सुन्दरसाथ जी

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धाम धनी जी ने खेल दिखाने के लिए अपना हुक्म का स्वरूप बनाया और 12000 रूहों के भी हुक्म के स्वरूप बनाये । अब चौ . मंथन करें ,धाम धनी की आज्ञा (आदेश) ने हुक्म स्वरूपा आत्माओं को माया का यह खेल दिखाया है। धाम धनी के हुक्म से ही आत्माओं ने इस हुक्म (आदेश) स्वरूप ब्रह्माण्ड को देखा है। संसार के सभी प्राणियों को न्याय (आखिरत) के दिन हुक्म से ही बहिश्तों का सुख प्राप्त होगा और दोजक में प्रायश्चित की अग्न...

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सुकव्यास कहे भागवत में, प्रेम न त्रिगुण पास । यह चौपाई श्री कुलजम सरूप साहिब के कौन से ग्रन्थ से है बताईए सुन्दरसाथ जी

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परिकरमा ग्रन्थ से प्रेम को अंग बरनन वाले प्रकरण की चौथी चौपाई

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